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हिंदी को राष्ट्रीय भाषा बताने पर शिवराजकुमार ने मांगी माफी, संजय दत्त के मराठी बयान पर भी विवाद

jantaserishta.com
9 Sept 2026 7:07 PM IST
हिंदी को राष्ट्रीय भाषा बताने पर शिवराजकुमार ने मांगी माफी, संजय दत्त के मराठी बयान पर भी विवाद
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नई दिल्ली: भाषा को लेकर दक्षिण भारत से लेकर महाराष्ट्र तक एक बार फिर बहस तेज हो गई है। कन्नड़ फिल्मों के सुपरस्टार शिवराजकुमार ने हिंदी को ‘राष्ट्रीय भाषा’ बताए जाने वाले अपने पुराने बयान पर माफी मांगते हुए सफाई दी है। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं को लेकर वह उस समय उलझ गए थे और इसी वजह से उनसे गलत शब्द का इस्तेमाल हो गया। वहीं, महाराष्ट्र में अभिनेता संजय दत्त के मराठी में बोलने से इनकार करने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है।

शिवराजकुमार ने अपने बयान पर मांगी माफी
शिवराजकुमार ने अपनी आने वाली फिल्म ‘ओरिजिनल मॉन्स्टर’ के प्रमोशन के दौरान हिंदी को ‘राष्ट्रीय भाषा’ बताया था। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा।
इसके बाद मीडिया से बातचीत में अभिनेता ने अपने बयान को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका मतलब हिंदी को राष्ट्रीय भाषाओं में से एक बताने का था। उन्होंने माना कि बोलते समय उनसे गलत शब्द निकल गया।
शिवराजकुमार ने कहा कि कन्नड़ उनके लिए हमेशा महत्वपूर्ण है। उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी और कहा कि उन्हें उस समय सही शब्द का इस्तेमाल नहीं कर पाने का अफसोस है। अभिनेता ने यह भी कहा कि जिस तरह हिंदी बोलने वालों के लिए उनकी भाषा महत्वपूर्ण है, उसी तरह कन्नड़ उनके लिए महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, हर भाषा अपने बोलने वालों के लिए खास होती है और इसे उसी नजरिए से देखा जाना चाहिए।
कैसे शुरू हुआ था शिवराजकुमार का विवाद?
यह विवाद तब शुरू हुआ था जब शिवराजकुमार से पैन-इंडिया फिल्मों में हिंदी डायलॉग बोलने को लेकर सवाल किया गया था। इसी दौरान उन्होंने हिंदी को अपनी दूसरी भाषा बताते हुए कहा था कि वह हिंदी बोल सकते हैं और इसे आसान भाषा बताया था। इसी बातचीत में उन्होंने हिंदी को ‘राष्ट्रीय भाषा’ भी कह दिया। उनके इस बयान पर सोशल मीडिया यूजर्स की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने उनके बयान की आलोचना की, जबकि उनके कुछ प्रशंसकों ने उनका बचाव करते हुए इसे शब्दों की गलती बताया।
दरअसल, कर्नाटक समेत दक्षिण भारत के कई हिस्सों में भाषा को लेकर पहले से ही बहस चलती रही है। कन्नड़ समर्थक संगठन सार्वजनिक जीवन में कन्नड़ को प्राथमिकता देने की मांग करते रहे हैं। इसी वजह से हिंदी और अंग्रेजी के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर भी समय-समय पर विवाद देखने को मिलता है।
कर्नाटक में साइन बोर्ड की भाषा को लेकर भी कई बार तनाव की स्थिति बनी है। स्थानीय संगठनों ने कन्नड़ को प्रमुखता देने की मांग की है और कुछ मामलों में हिंदी तथा अंग्रेजी में लगे बोर्डों को लेकर विरोध भी हुआ है।
अब संजय दत्त के मराठी बयान पर विवाद
इसी बीच महाराष्ट्र में अभिनेता संजय दत्त का एक बयान चर्चा में आ गया है। मुंबई में आयोजित एक दही हांडी कार्यक्रम के दौरान संजय दत्त मंच से हिंदी में बात कर रहे थे। कार्यक्रम में मौजूद महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने उनसे मराठी में बोलने के लिए कहा।
रिपोर्ट के मुताबिक, संजय दत्त ने मराठी में बोलने से इनकार करते हुए कहा कि वह करीब छह साल येरवडा जेल में रहे, लेकिन वहां भी मराठी नहीं सीख पाए।
संजय दत्त के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। कुछ यूजर्स ने अभिनेता की आलोचना करते हुए सवाल उठाया कि महाराष्ट्र में लंबे समय तक रहने के बावजूद उन्हें मराठी क्यों नहीं आती। वहीं, कुछ लोगों ने इसे व्यक्तिगत भाषा पसंद का मामला बताया।
BJP विधायक ने मंत्री पर साधा निशाना
संजय दत्त के बयान पर भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने महाराष्ट्र के मंत्री प्रताप सरनाईक पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर किसी कलाकार को मराठी नहीं आती तो उससे भाषा बोलने का आग्रह किया जाता है, जबकि आम ऑटो और टैक्सी चालकों पर मराठी बोलने को लेकर दबाव बनाया जाता है।
नरेंद्र मेहता ने इसी आधार पर सवाल उठाया कि भाषा के नियम आम लोगों और बड़े लोगों के लिए अलग-अलग क्यों दिखाई देते हैं। उन्होंने इसे लेकर मंत्री की भूमिका पर भी टिप्पणी की।
सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस
संजय दत्त के बयान के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ यूजर्स ने कहा कि भाषा को लेकर नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। वहीं, कुछ लोगों ने अभिनेता का बचाव करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को अपनी पसंद की भाषा में बोलने का अधिकार होना चाहिए।
शिवराजकुमार और संजय दत्त से जुड़े दोनों मामलों ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि फिल्मों और सार्वजनिक मंचों पर भाषा की भूमिका को किस तरह देखा जाना चाहिए। एक तरफ क्षेत्रीय भाषाओं को सम्मान और प्राथमिकता देने की मांग है, तो दूसरी तरफ कलाकारों और आम लोगों की भाषा की पसंद को लेकर भी बहस जारी है।
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